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MP Board Class 12th Hindi Chapter 3 Solutions ठेस

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In this article, we will share MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 3 ठेस (कहानी, फणीश्वरनाथ ‘रेणु’) with pdf file solutions from latest MP Board Book.

ठेस परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. ‘ठेस’ कहानी के कहानीकार हैं –
(क) फणीश्वरनाथ ‘रेणु’
(ख) प्रेमचंद
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) जैनेंद्र कुमार
उत्तर:
(क) फणीश्वरनाथ ‘रेणु’।

प्रश्न 2. बड़े लोगों की बस…….होती है –
(क) हवेली ही बड़ी
(ख) बात ही बड़ी
(ग) धमकियाँ ही बड़ी
(घ) डींगें ही बड़ी
उत्तर:
(ख) बात ही बड़ी।

प्रश्न 3. सिरचन के किसी दिन आकर पूरा कर दूंगा में किसी दिन’ का अर्थ है –
(क) दो-चार दिन बाद
(ख) जब मौका मिलेगा
(ग) कभी नहीं
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) कभी नहीं।

प्रश्न 4. ‘आज तो अधकपाली दर्द से माथा टनटना रहा है’ में ‘अधकपाली’ का अर्थ है –
(क) आधा सरदर्द
(ख) आधा पैर दर्द
(ग) आधा हाथ दर्द
(घ) अधपका खाने का दर्द
उत्तर:
(क) आधा सरदर्द

प्रश्न 5. सिरचन जब काम में मगन रहता है तो उसकी………निकल आती है।
(क) लार जरा बाहर
(ख) जीभ जरा बाहर
(ग) आँखें जरा बाहर
(घ) आँखें, जीभ बाहर
उत्तर:
(ख) जीभ जरा बाहर।

प्रश्न 6. सिरचन जब काम करता था दब –
(क) उसका लार जहर बाहर निकल जाता था।
(ख) उसकी जीभ जरा बाहर निकल जाती थी।
(ग) उसकी आँखें जरा बाहर निकल जाती थीं।
(घ) उसके होठ जरा बाहर निकल जाते थे।
उत्तर:
(ख) उसकी जीभ जरा बाहर निकल जाती थी।

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II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर करें –

  1. ‘ठेस’ कहानी के लेखक हैं ……..। (गुलाबराय फणीश्वरनाथ ‘रेणु’)
  2. फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ ……. उपन्यासकार हैं। (जासूसी आंचलिक)
  3. ‘ठेस’ कहानी ……. पर केन्द्रित है। (स्वाभिमान/अहंकार)
  4. ‘टेस’ कहानी का नायक ………. है। (पंचानंद चौधरी सिरचन)
  5. सिरचन ने ………. को उपहार दिया था। (चाची/मानू)

उत्तर:

  1. फणीश्वरनाथ ‘रेणु’
  2. आंचलिक
  3. स्वाभिमान
  4. सिरचन
  5. मानू।

III. निम्नलिखित कथनों में सत्य/असत्य छाँटिए- (M.P. 2010-2011)

  1. ‘ठेस’ एक निबन्ध है।
  2. ‘ठेस’ कहानी शहरी जीवन की है।
  3. सिरचन ने मानू को उपहार में शीतलपाटी, चिक और कुश की एक जोड़ी आसनी दी थी।
  4. सिरचन एक स्वाभिमान कलाकार है।
  5. मोहर छाप वाली धोती आठ रुपये में आती है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. सत्य।

IV. निम्नलिखित के सही नोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.

  1. शादी (क) चुप हो जाना
  2. पुराना (ख) अरज
  3. अवाक् (ग) धुराना
  4. काम (घ) व्याह
  5. खुशमद (ङ) काज

उत्तर:

(1) (घ)
(2) (ग)
(3) (क)
(4) (ङ)
(5) (ख)।

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V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

  1. सिरचन मान से मिलने रेलवे स्टेशन क्यों गया था?
  2. सिरचन कौन था?
  3. “ठहरो! मैं माँ से जाकर कहती है। इतनी बड़ी बात।” यहकसने कहा?
  4. “यह तुम्हारी माँ ही कर सकती हबबुनी।” यह कथन किसका है?
  5. सिरचन ने किसको तिरस्कृत किया?

उत्तर:

  1. अपने हाथ से बनी चीजें देने के लिए।
  2. सिरचन एक ग्रामीण कलाकार था।
  3. भज्जू महाजन की बेटी ने।
  4. सिरचन ने।
  5. भज्जू महाजन की पत्नी को।

ठेस लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘ठेस’ कहानी का नायक कौन है?
उत्तर:
‘ठेस’ कहानी का नायक सिरचन है।

प्रश्न 2. सिरचन का चरित्र कहानी में किस बात को उजागर करता है?
उत्तर:
सिरचन का चरित्र ग्रामीण कलाकार के आत्मसम्मान को उजागर करता है।

प्रश्न 3. सिरचन गाँववालों से किस व्यवहार की अपेक्षा करता है?
उत्तर:
सिरचन गाँववालों से सहज और आत्मीय व्यवहार की अपेक्षा करता है।

प्रश्न 4. सिरचन ने गाँव टोली के पंचानंद चौधरी के छोटे लड़के को कैसे बेपानी कर दिया था?
उत्तर:
सिरचन ने लेखक के सामने ही चौधरी के लड़के को यह कहकर बेपानी कर दिया कि तुम्हारी भाभी कंजूसी से तरकारी परोसती है और इमली की कढ़ी तो उसकी (सिरचन की) घरवाली बनाती है।

प्रश्न 5. लेखक के परिवार के साथ सिरचन का व्यवहार किस प्रकार अलग होता था?
उत्तर:
सिरचन स्वादिष्ट खाने का शौकीन था। वह जहाँ भी काम करने जाता, खाने की लालसा जरूर रखता पर वह लेखक के परिवार में काम करते समय कभी पूजा-भोग की बात नहीं करता था।

प्रश्न 6. सिरचन क्या-क्या बनाता था? (M.P.2011)
उत्तर:
सिरचन शीतलपाटी, चिक, मोढ़े, जमले, छतरी और टोप बनाता था।

प्रश्न 7. बड़ी भाभी ने मानू के संबंध में क्या चेतावनी दी धी?
उत्तर:
बड़ी भाभी ने तीन जोड़े फैशनेबल चिक और पटेर की दो शीतलपाटियों को मानू के दूल्हे के लिए भेजे जाने संबंधी चेतावनी दी थी।

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ठेस दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. सिरचन की तीन चारित्रक विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
कुशल कारीगर:
सिरचन अपने इलाके का एक निपुण कारीगर है। उसके जैसी मोथी घास और पटेर की शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोरे के मोढ़े, मूंज की रस्सी के बड़े-बड़े जाले, ताल के सूखे पत्तों की छतरी-टोपी कोई नहीं बना सकता। वह एक प्रतिभाशाली कलाकार है।

स्वाभिमानी;
सिरचन एक स्वाभिमानी कलाकार है। वह गरीब भले ही हो, लेकिन किसी का तिरस्कार सहन नहीं कर सकता। अपमानित होने की अपेक्षा वह भूखा रहना पसंद करता है। वह लेखक की मँझली भाभी और मानू की चाची के द्वारा तिरस्कृत होने पर काम अधूरा छोड़कर चला जाता है।

स्वादिष्ट भोजन का शौकीन:
सिरचन स्वादिष्ट भोजन का शौकीन है। यदि उसे स्वादिष्ट भोजन न मिले तो वह काम नहीं करता। उसे तली, बघारी तरकारी, दही की कढ़ी, मलाई वाला दूध पसंद है। मनोनकूल भोजन न मिलने पर वह कोई न कोई बहाना बनाकर खिसक जाता है। इसीलिए लोग उसे चटोर भी कहते हैं।

प्रश्न 2. सिरचन मानू के घर से काम छोड़कर क्यों चला जाता है?
उत्तर:
सिरचन जिसके घर काम करता है, उनसे सहज और आत्मीय व्यवहार की अपेक्षा करता है। जब सिरचन मानू के घर में काम कर रहा है तो उसकी मँझली भाभी तथा उसकी चाची उसे तिरस्कृत और अपमानित करती हैं। वह मानू के घर से काम छोड़कर चला जाता है। दूसरे वह स्वयं को मानू की हवेली में सर्वाधिक सम्मानित अनुभव करता था क्योंकि वहाँ उसकी कारीगरी का सम्मान होता था, परंतु अब उसे वहाँ भी तिरस्कृत और अपमानित किया गया है इस कारण उसके हृदय को ठेस पहुँचती है और वह काम अधूरा छोड़कर चला जाता है।

प्रश्न 3. ‘ठेस’ कहानी का उद्देश्य संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘ठेस’ कहानी का उद्देश्य एक ग्रामीण कलाकार के स्वाभिमान और आत्मगौरव को प्रकट करना है। कलाकार दूसरों से सम्मान प्राप्त करने का आकांक्षी होता है। उसे जब सम्मान की जगह तिरस्कार और अपमान प्राप्त होता है तो उसके संवेदनशील कोमल हृदय को ठेस पहुंचती है। यही ठेस उसे भविष्य में काम न करने का कठोर निर्णय लेने पर विवश करती है।

प्रश्न 4. सिरचन को गाँववाले चटोरा क्यों समझते थे?
उत्तर:
सिरचन को गाँववाले चटोरा समझते थे। ऐसा इसलिए कि उसे खाने को दही की कढ़ी, मलाई वाला दूध जरूर चाहिए, इसके बिना उसका मन काम में नहीं लगता था।

प्रश्न 5. सिरचन को लोग बेकार ही नहीं, अपितु बेगार क्यों समझते थे?
उत्तर:
जब दूसरे मजदूर खेत पर पहुँचकर एक तिहाई काम कर चुके होते थे, तब वह हाथ में खुरपी डुलाता हुआ दिखाई देता। फिर पगडंडी पर तौल-तौलकर कदम रखता हुआ धीरे-धीरे काम पर आता था। इसीलिए सिरचन को लोग बेकार ही नहीं अपितु बेगार भी समझते थे।

ठेस लेखक-परिचय

प्रश्न 1. फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
आंचलिक कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म बिहार के पूर्णियाँ जिले के औराही हिंगना गाँव में 4 मार्च, 1921 ई० को हुआ था। इनकी विद्यालयी शिक्षा इंटरमीडिएट तक ही हो पाई। आपने उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश तो लिया, लेकिन महात्मा गाँधी के आह्वान पर पढ़ाई छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। आपने सन् 1942 ई० के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भाग लिया लेकिन 1952 में राजनीति को छोड़कर पूरी तर पे साहित्य-सेवा में जुट गए। सन् 1970 ई० में आपको ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। रेणुजी जीवन के अंतिम समय तक साहित्य सेवा करते रहे। 11 अप्रैल, 1977 ई० को इनका देहांत हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ:
हिंदी साहित्य जगत् में ‘रेणुजी’ आंचलिक उपन्यास के जनक माने जाते हैं। उन्होंने कथाकार के साथ-साथ रिपोर्ताज लेखक के रूप में भी ख्याति प्राप्त की। उनका जीवन उतार-चढ़ाव व संघर्ष से भरा था। उनके रचनात्मक साहित्य ने देश की राजनीति को भी प्रभावित किया। सन् 1954 में इनका बहुचर्चित आंचलिक उपन्यास मैला आँचल प्रकाशित हुआ जिसने हिंदी उपन्यास को एक नई दिशा दी। हिंदी जगत् में आंचलिक उपन्यासों का प्रारंभ मैला आँचल से ही हुआ। आंचलिकता की इस अवधारणा ने उपन्यासों और कथा-साहित्य में गाँव की भाषा-संस्कृति और वहाँ के लोकजीवन को केंद्र में ला खड़ा किया।

लोकगीत, लोकसंस्कृति, लोकभाषा लोकनायक की इस अवधारणा ने भारी-भरकम चीज़ एवं नायक की जगह अंचल को ही नायक बना डाला। उनकी रचनाओं में अंचल कच्चे और अनगढ़ रूप में ही आता है इसलिए उनका यह अंचल एक त शस्य-श्यामल है तो दूसरी तरफ धूलभरा और मैला भी।.स्वातंत्र्योत्तर भारत में जब सारा चिकास शहर केंद्रित होता जा रहा था, ऐसे में रेणुजी ने अपनी रचनाओं से अंचल की समस्याओं की ओर भी लोगों का ध्यान खींचा। उनकी रचनाएँ इस अवधारणा को भी पुष्ट करती हैं कि भाषा की सार्थकता वोली के साहचर्य में ही है।.

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