सिर्फ 19 साल की उम्र में कॉलेज के एक छात्र ने ऐसी स्टार्टअप शुरू की है जो अंतरिक्ष तकनीक की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकती है। इस स्टार्टअप का नाम Apolink है और इसे मशहूर अमेरिकी फंडिंग प्लेटफॉर्म Y Combinator का साथ मिला है। हाल ही में Apolink ने करीब $4.3 मिलियन (लगभग ₹35 करोड़) की फंडिंग हासिल की है।
क्या करती है Apolink?
Apolink का मकसद है कि जो सैटेलाइट धरती के नजदीक (Low Earth Orbit – LEO) में घूमते हैं, उनसे 24×7 कनेक्टिविटी दी जा सके। आज की तारीख में जब इंटरनेट हर किसी की ज़रूरत बन चुका है, Apolink यह सुनिश्चित करना चाहती है कि दुनिया के किसी भी कोने में इंटरनेट बिना रुके और बिना बाधा के चलता रहे।
क्यों है ये जरूरी?
अभी जो LEO सैटेलाइट होते हैं, उनसे जुड़ने में कई बार नेटवर्क छूट जाता है या डेटा भेजने में देरी होती है। Apolink इस समस्या का समाधान निकाल रही है। यह स्टार्टअप ऐसे ग्राउंड स्टेशन (धरती पर बने तकनीकी केंद्र) बना रही है, जो सैटेलाइट्स से लगातार जुड़कर इंटरनेट और डेटा ट्रांसफर को बिना रुकावट चलाएंगे।
भारत जैसे देशों को होगा फायदा
भारत जैसे बड़े और विविधताओं वाले देश में, जहां आज भी कई गाँवों और दूरदराज के इलाकों में तेज़ इंटरनेट की कमी है, वहाँ Apolink जैसी तकनीक क्रांतिकारी साबित हो सकती है। इससे रिमोट एजुकेशन, ऑनलाइन हेल्थ सर्विस, आपदा प्रबंधन और सरकारी सेवाओं को बेहतर किया जा सकता है।
स्टार्टअप का सफर
इस युवा फाउंडर ने Apolink की शुरुआत बहुत कम संसाधनों के साथ की थी, लेकिन आज उनकी मेहनत और सोच ने उन्हें Y Combinator जैसे बड़े निवेशकों तक पहुंचा दिया है। अब Apolink तेजी से अपने ग्राउंड स्टेशन बढ़ा रही है ताकि वह सैटेलाइट्स से 24 घंटे कनेक्शन बनाए रख सके।
Apolink न केवल तकनीकी क्षेत्र में एक बड़ी छलांग है, बल्कि यह आने वाले समय में उन लाखों लोगों की ज़िंदगी बदल सकती है, जो अभी भी तेज़ और स्थिर इंटरनेट का इंतज़ार कर रहे हैं। एक 19 साल के छात्र की ये पहल यह दिखाती है कि नए आइडिया और सही दिशा हो, तो उम्र मायने नहीं रखती।