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MP Board Class 12th Hindi Chapter 7 बल-बहादुरी Solutions

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 बल-बहादुरी (निबन्ध, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’) with pdf file solutions from latest MP Board Books.

बल-बहादुरी परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1. ‘बल-बहादुरी’ निबंध के लेखक हैं –
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
(ख) कन्हैयालाल नंदन
(ग) भगीरथ मिश्र
(घ) यतीन्द्र मिश्र
उत्तर:
(क) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’।

प्रश्न 2. कौन-सी बहादुरी सात्विक और ग्रहणीय है –
(क) अपनी स्वार्थवृत्ति को पूरा करने वाली
(ख) जनकल्याण करने वाली
(ग) लोगों को भयभीत कर कायर बनाने वाली
(घ) निर्दोष जनता को सताने वाली
उत्तर:
(ख) जनकल्याण करने वाली।

प्रश्न 3. अज्ञान का पुत्र बताया गया है –
(क) लोभ को
(ख) मोहमाया को
(ग) अहंकार को
(घ) क्रूरता को
उत्तर:
(ग) अहंकार को।

प्रश्न 4. राष्ट्र एवं जातियों के गौरव की स्थिति किसके शिशुओं जैसी है?
(क) कोकिल के
(ख) मनुष्य के
(ग) जानवरों के
(घ) राक्षसों के
उत्तर:
(क) कोकिल के।

प्रश्न 5. बल और बुद्धि का संबंध वही है जो –
(क) देह और आँख का
(ख) बुद्धि और बल का
(ग) त्याग और तपस्या का
(घ) स्वार्थ और भोग का
उत्तर:
(क) देह और आँख का।

प्रश्न 6. औरंगजेब कम बल राशि का स्वामी होते हुए भी साम्राज्य का स्वामी किसके प्रभाव से बन सका –
(क) बुद्धि कौशल से
(ख) रण-कौशल से
(ग) इच्छा शक्ति से
(घ) भाग्य-कौशल से
उत्तर:
(क) बुद्धि कौशल से।

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प्रश्न 7.
बल ………….. होता है।
(क) अंधा
(ख) कान का कच्चा
(ग) अभिमानी
(घ) स्वार्थी
उत्तर:
(क) अंधा।

प्रश्न 8. पश्चिम …… उपासक है।
(क) शरीर बल का
(ख) आत्मबल का
(ग) सैन्य बल का
(घ) धन-बल का
उत्तर:
(क) शरीर बल का।

प्रश्न 9.
भारत ………. उपासक है।
(क) आत्मबल का
(ख) शरीर-बल का
(ग) धन-बल का
(घ) पशु-वल का
त्तर:
(क) आत्मबल का।

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प्रश्न 10.
इतिहास-रत्न जयमल और वीर शिरोमणि फत्ता का हम कितना ही गुणगान करें, पर उसका सच्चा सम्मान तो –
(क) झाँसी की वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई ही कर सकती थी।
(ख) मुगल सम्राट वीर अकबर ही कर सकता था।
(ग) मुगल सम्राट महान् शाहजहाँ ही कर सकता था।
(घ) उसके होठ जरा बाहर निकल जाते थे।
(ङ) औरंगजेब ही कर सकता था।
उत्तर:
(ख) मुगल सम्राट वीर अकबर ही कर सकता था।

II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर करें –

  1. शाहजहाँ का उत्तराधिकारी अत्यन्त ………. था। (चतुर बलवान)
  2. कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ के निबंध का नाम ………. है। (बल बहादुरी मेरे सपनों का भारत)
  3. भारत ………. का उपासक है। (आत्मवल शक्तिबल)
  4. प्रकृति ने गाँधी की ………. की। (महावृष्टि, महासृष्टि)
  5. वे जहाँ लड़े ………. की भाँति लड़े। (सिंह/शेर)

उत्तर:

  1. बलवान
  2. बल-बहादुरी
  3. आत्मबल
  4. महासृष्टि
  5. सिंह।

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III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

  1. ‘बल-बहादुरी’ निबंध के लेखक यतीन्द्र मिश्र हैं। (M.P. 2009)
  2. शाहजहाँ का उत्तराधिकारी दारा था।
  3. बल में देवत्व का निवास है।
  4. बल की चरम सीमा नहीं है।
  5. गुरुनानक के आत्मज दीवार में चुने गए।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. असत्य।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

उत्तर:

(i) शिरोमणि
(ii) ताण्डव
(iii) वल्लरी
(iv) परागमाला
(v) उपवन

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

  1. सौभाग्य-श्री का पुनीत वरदान क्या है?
  2. आकर्षण का केन्द्र क्या है?
  3. वीरता का सार किसमें है?
  4. गाँधी की महासृप्टि किसने की?
  5. स्वर्ग की सीमा में कौन ले जाता है?

उत्तर:

  1. बल के साथ बुद्धि का एकमात्र संयोग।
  2. बल।
  3. न्यौछावर करने में।
  4. प्रकृति ने।
  5. विवेक का साहचर्य।

बल-बहादुरी लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कायरता का पिता और उसकी परी किसे बताया गया है?
उत्तर:
भय को कायरता का पिता और दीनता को उसकी सहचरी बताया गया है।

प्रश्न 2.
पैशाचिकता की सखी कौन है?
उत्तर:
पैशाचिकता की सखी क्रूरता है।

प्रश्न 3.
राम और कृष्ण की जयंती मनाने का कारण क्या बताया गया है?
उत्तर:
राम और कृष्ण की जयंती मनाने का कारण उनके द्वारा बल का सदुपयोग करना बताया गया है।

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प्रश्न 4.
शाहजहाँ का उत्तराधिकारी दारा, कितने हाथियों की बलराशि का स्वामी था?
उत्तर:
शाहजहाँ का उत्तराधिकारी दारा, साठ हजार हाथियों से भी अधिक बलराशि का स्वामी था।

प्रश्न 5.
कवि की कविता की सच्ची प्रशंसा करने का अधिकारी किसे बताया गया है?
उत्तर:
एक कवि की कविता की सच्ची प्रशंसा का अधिकारी दूसरे कवि को बताया गया है।

प्रश्न 6.
बल के अभाव में क्या दिखाई देता है?
उत्तर:
बल के अभाव में कायरता का दयनीय दर्शन दिखाई देता है।

प्रश्न 7.
क्रूरता क्या करती है?
उत्तर:
क्रूरता अज्ञान के पुत्र अहंकार का पोषण करती है।

प्रश्न 8.
बल और बुद्धि का संबंध किस तरह का है?
उत्तर:
बल और बुद्धि का संबंध देह और आँख की तरह है।

बल-बहादुरी दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किनका पारस्परिक विरोध विश्व के विशाल राष्ट्रों और जातियों को हृदयबेधी इतिहास में बदल देता है?
उत्तर:
बल और प्रेम का पारस्परिक विरोध विश्व के विशाल राष्ट्रों और जातियों को हृदयबेधी इतिहास में बदल देता है। इनमें परस्पर विरोध के कारण विशाल राष्ट्रों और जातियों को नष्ट-भ्रष्ट कर देता है।

प्रश्न 2.
बल का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
बल का बड़ा महत्त्व है। जो मनुष्य शक्तिशाली होता है, उसका व्यक्तित्व सबको अपनी ओर आकर्षित करता है। उसको सभी प्रेम और श्रद्धा के साथ प्रेम का उपहार देते हैं और स्वयं को सौभाग्यशाली समझते हैं। शक्तिशाली व्यक्ति सभी में लोकप्रिय हो जाता है।

प्रश्न 3.
किस वरदान को पुनीत कहा गया है और क्यों?
उत्तर:
बल और बुद्धि के संयोग को सौभाग्य श्री का वरदान कहा गया है; क्योंकि जिस मनुष्य जाति और राष्ट्र के लोगों को यह वरदान प्राप्त हो जाता है, सफलता उनके सामने हाथ वाँधे खड़ी होने में ही अपनी सार्थकता समझती है। वल-बुद्धि के संयोग से ही प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

प्रश्न 4.
एक की जयंती मनाई जाती है और दूसरे की नहीं। क्यों?
उत्तर:
एक की जयंती मनाई जाती है और दूसरे की नहीं। ऐसा इसलिए कि एक ने अपनी शक्ति का उपयोग जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए किया था। उसने अन्यायी, अत्याचारी और दुराचारी प्रवृत्ति के लोगों में फंसी जनता को मुक्ति बीमार का इलाज दिलाने के लिए उनका संहार किया था। दूसरे ने जनता के अधिकारों का बलपूर्वक हनन किया था। उसके अधिकारों को छीना और उसे खूब सताया था।

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प्रश्न 5.
बल की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
बल में आकर्षण होता है। इसलिए वह अपनों को ही नहीं, अपितु दूसरों को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। फलस्वरूप उसे सभी ललचाई हुई दृष्टि से देखते हैं। उसके प्रति प्रेम और श्रद्धा के उपहार समर्पित करते हैं। फिर उसे प्रशंसा के एक-एक वाक्य सुनाने लगते हैं।

बल-बहादुरी पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

बल-बहादुरी लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बल और सहृदयता में क्या अंतर है?
उत्तर:
बल में पौरुष होने का भाव होता है, जबकि सहृदयता में देवत्व होने का भाव होता है।

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प्रश्न 2.
मानवता के विकास की पुण्य-भूमि किसे कहा गया है?
उत्तर:
अभय और शांति के सुंदर मिलन को मानवता के विकास की पुण्य-भूमि कहा गया है।

प्रश्न 3.
बल का उपयोग विवेक के साथ क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
बल का उपयोग विवेक के साथ करने से व्यक्ति स्वर्ग की सीमा तक पहुँच जाता है।

प्रश्न 4.
लेखक ने बल के किन दो रूपों का वर्णन किया है?
उत्तर:
लेखक ने बल के सदुपयोग और दुरुपयोग दो रूपों का प्रयोग किया है।

प्रश्न 5.
सम्राट अकबर ने किन वीरों का सम्मान किया था?
उत्तर:
सम्राट अकबर ने जयमल और फत्ता नामक वीरों का सम्मान किया था।

प्रश्न 6.
अंग्रेज सेनापति द्वारा झाँसी की रानी की वीरता की प्रशंसा को लेखक ने क्यों महत्त्वपूर्ण माना है?
उत्तर:
लेखक अंग्रेज सेनापति ह्यूरोज द्वारा झाँसी की रानी की वीरता की प्रशंसा को इसलिए महत्त्वपूर्ण माना है क्योंकि एक प्रतिद्वंद्वी वीर ने उसकी वीरता की प्रशंसा की थी।

बल-बहादुरी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘सबल के बल का सदुपयोग ही सफलता की कुंजी है।’ इस कथन को कीजिए। (M.P. 2009, 2012)
उत्तर:
शक्तिशाली व्यक्ति यदि बल का सदुपयोग करे तो सफलता उसके कदम चूमती है। उसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। राम और कृष्ण इसके उदाहरण हैं। उन्होंने बल का सदुपयोग किया था इसीलिए उनकी जयंती मनाई जाती है। रावण और कंस दोनों ने बल का दुरुपयोग किया था। यही कारण है कि उनके स्मरण मात्र से मन में घृणा उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
सात्त्विक सहयोग को राष्ट्रों के निर्माण की मूलशिला क्यों कहा गया है?
उत्तर:
सात्त्विक सहयोग को राष्ट्रों के निर्माण की मूलशिला कहा गया है क्योंकि उसमें बल और प्रेम का सहयोग होता है। सात्त्विक सहयोग में अभिमान एवं कर्मण्यता, त्याग और ईमानदारी आदि मानवीय गुण सम्मिलित होते हैं।

प्रश्न 3.
बल और बुद्धि में पारस्परिक संबंध है-उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
बल और बुद्धि में पारस्परिक संबंध है क्योंकि बुद्धि के बिना बल व्यर्थ है। बल के अभाव में बुद्धि अपंग के समान है। उदाहरणार्थ-राजदूतों में वल था लेकिन बुद्धि का अभाव था। वे युद्ध-भूमि में शत्रुओं से सिंह की भाँति लड़े। उनकी वीरता की शत्रु व मित्र सभी ने प्रशंसा की। इतनी वीरता दिखाने के बाद भी वे पराजित हुए। यदि उनमें बल के साथ बुद्धि होती, तो उनका इतिहास कुछ और ही होता।

प्रश्न 4.
लेखक के बल की चरम सीमा कहाँ तक बतलाई है?
उत्तर:
लेखक ने बल की चरम सीमा शत्रुओं के समूह-गर्जन में, केसरी के साथ खेलने में या फिर देश और धर्म के लिए हँसते-हँसते अपने प्राणों का बलिदान देने में बताई है।

प्रश्न 5.
बल की दृष्टि से पश्चिम और भारत में क्या अंतर है? (M.P. 2010)
उत्तर:
बल की दृष्टि से पश्चिम और भारत की दृष्टि में पर्याप्त अंतर है। पश्चिम शारीरिक बल का उपासक है और भारत आत्मबल अर्थात् बुद्धि के बल को महत्त्व देता है।

प्रश्न 6.
शरीर-बल और आत्म-बल में लेखक ने किसे श्रेष्ठ माना है? आज विश्व कल्याण के लिए दोनों में से कौन-सा अधिक उपयोगी है?
उत्तर:
लेखक ने शरीर-बल और आत्मवल में से आत्मबल को श्रेष्ठ माना है। आज विश्व कल्याण के लिए दोनों में से आत्मबल सर्वाधिक उपयोगी है।

दिए गए वाक्यों को निर्देशानुसार रूपांतरित कीजिए –

  1. मोहन पुस्तक खरीदकर पढ़ता है। (मिथ वाक्य में)
  2. समय बहुत खराब है, इसलिए देखभाल कर चलना चाहिए। (सरल वाक्य में)
  3. विद्वानों का सभी आदर करते हैं। (मिश्र वाक्य में)
  4. तुम परिश्रम करो और परीक्षा में सफल हो जाओ। (सरल वाक्य में)
  5. राम पुस्तकें पढ़ता है जिससे उसे ज्ञान प्राप्त होता है। (संयुक्त वाक्य में)

उत्तर:

  1. मोहन ने कहा कि वह पुस्तक खरीदकर पढ़ता है।
    या
    जब मोहन पुस्तक खरीदता है, तब पढ़ता है।
  2. देखभाल कर चलो समय बहुत खराब है।
  3. जो विद्वान हैं, उनका सभी आदर करते हैं।
  4. तुम परिश्रम करके परीक्षा में सफल हो सकते हो।
  5. राम पुस्तकें पढ़ता है और उसे ज्ञान प्राप्त होता हैं।

बल-बहादुरी योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
वीर पुरुषों और वीरांगनाओं के चित्रों का संग्रह कर अलबम बनाइए।
उत्तर:
छात्र राम, कृष्ण, अर्जुन, महाराणा प्रताप, शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई आदि के चित्र एकत्र कर अलबम बना सकते हैं।

प्रश्न 2.
किसी बलिदानी वीर के बारे में 10 पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई, भगतसिंह आदि किसी पर भी छात्र स्वयं दस पंक्तियाँ लिखें।

प्रश्न 3.
किसी देश-भक्त का रेखाचित्र बनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 4.
‘बल और बुद्धि में कौन श्रेष्ठ है’ विषय पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

बल-बहादुरी लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म सन् 1906 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले में देवबंद नामक स्थान में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूलों में हुई। उनकी रुचि प्रारंभ से ही राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यों में थी। उच्च शिक्षा ग्रहण करते समय ही वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। फलस्वरूप उनकी शिक्षा पूर्ण न हो सकी। ‘प्रभाकर’ जी समय-समय पर राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलनों में सक्रिय भाग लेने के कारण कई बार जेल गए। छोटी आयु से ही वे अखबारों में लिखने लगे। उन्होंने कलकत्ता (अब कोलकाता) से प्रकाशित होने वाले ‘ज्ञानोदय’ नामक पत्र का अनेक वर्षों तक सफल संपादन किया।

सहारनपुर में अपना छापाखाना (प्रेस) स्थापित किया और ‘नया जीवन’ नामक पत्रिका का प्रकाशन किया। संरमरण और रेखाचित्र के क्षेत्र में यह पत्रिका बेजोड़ थी। इसके कारण इन्हें विशेष ख्याति मिली। सन् 1990 में हिन्दी सेवाओं के लिए उन्हें ‘पद्मश्री’ की उपाधि से अलंकृत किया गया। ‘प्रभाकर’ जी.की रचनाओं में गाँधीवादी विचारधारा का स्पष्ट प्रभाव है। उनकी प्रत्येक रचना में समाज एवं परिवार को सुखी बनाने का उद्देश्य दिखाई पड़ता है। उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय भावना का भी समावेश है। सन् 1995 में उनका स्वर्गवास हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ:
‘प्रभाकर’ जी ने अपनी साहित्यिक यात्रा का प्रारंभ एक पत्रकार के रूप में किया। उन्होंने लघु कहानियाँ. संस्मरण, रेखाचित्र तथा निबन्धों की रचना की। वे हिन्दी के रेखाचित्र, संस्मरण एवं ललित निबंधों के श्रेष्ट रचनाकारों में गिने जाते हैं।

रचनाएँ:
नई पीढ़ी नए विचार, जिंदगी मुस्कराई, माटी हो गई सोना, आकाश के तारे, धरती के फूल, दीप जले : शंख बजे, बाजे पायलिया के घुघरू, क्षण बोले : कण मुसकाए, महके आँगन चहके द्वार, जिएँ तो ऐसे जिएँ आदि।

भाषा-शैली:
‘प्रभाकर’ जी की भाषा-शैली सजीव, प्रवाहपूर्ण, आत्मीय एवं मर्मस्पर्शी है। वे छोटी-से-छोटी एवं वड़ी-से-बड़ी बात को सहजता से कह जाने में सिद्धहस्त थे। उनकी समस्त रचनाओं में नवीनता एवं ताजगी है, जो पाठकों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। उनकी भाषा-शैली में उदाहरणों व सूक्तियों का पर्याप्त मात्रा में समावेश है। वे अपनी बात की पुष्टि में उदाहरण का प्रयोग करते हैं। उनकी भाषा विषयानुकूल है।

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