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Sad Earth : All From Birth to the End

ए चहल – पहल , ए रवानगी कहाँ खो गई बताओ।

ए पृथ्वी हमसे ही रोगई जरा समझाओ।।

स्वागत है आपका हमारे Sad Earth : All From birth to the end.

हम इसमें आपको हमारी यानि मानव सभ्यता की ऐसी गलतियों से रुबारी कराएँगे जिसमे आपको पता चलेगा की हमने किया बिगाड़ा है पृथ्वी का और क्या अंत नजदीक है। यह आर्टिकल किसी भी मिथ पर नहीं बल्कि मानव सभ्यता के कारनामे पर है। आगे पढ़े

पहले यह देखे

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ये जो फोटो आप ऊपर देख रहे इसके बारे में मुझे बताने की जरुरत नहीं मगर फिर भी यहाँ ऊपर दिल्ली और निचे यमुना का फोटो आप इनमे देख सकते है की लॉकडाउन से पहले केसा था और बाद में कैसा है सिर्फ यही नहीं बल्कि पूरी दुनिआ इस वक्त पृथिवी 90% तक मानव के आक्रमण से बची हुई है।

एक महामारी के चलते हुए और पूरी पृथ्वी फिरसे अपना रंग बिखेरने लगी है, सिर्फ लॉकडाउन होने से। सरकारे पहले भी लाखो करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है मगर इतना साफ नहीं करवा पायी थी, मगर यह कबतक जबतक लॉकडाउन है तब तक ही ऐसा रहेगा फिर से फैक्टरियां चालूं होंगी और नदिया मेलि होंगी ,

सडको पे फिर से गाड़ियां दौड़ेंगी उसी रफ़्तार से जैसे पहले दौड़ती थी और फिर से हवा गन्दी होगी। लेकिन क्या सरकार को अब कोई नया नियम बनाना चाइये ? जिससे ऐसे ही कंट्रोल में रख के पृथ्वी को रंग बिखेरने दे. निचे अपनी राय जरूर दे।

चलो स्टार्ट करते है। अपने सफर को Sad Earth: All from birth to the end /पृथ्वी के जन्म से अंत तक। नेक्स्ट पर टच करें

जन्म पृथ्वी और मानव सभ्यता की।

image by dreamstime.com

जैसा की आप सभी जानते है हमारी धरती का जन्म कई हजारो साल पहले एक ग्रह के टकराव से हुआ। जब ये टकराव हुआ उसके बाद हमारी धरती कई सालों तक एक गरम जवालामुखी की तरह पनपती रही, और कुछ सालों में हमारी पृथ्वी में बदलाव आने लगा उसके बाद हमारी पृथ्वी पर बारिस होने लगी. बारिश के कारण वातावरण में बदलाव आया पृथ्वी की सतह ठंढी हुई। उसी समय पानी में छोटे छोटे माइक्रो ऑर्गनिज़मस का निर्माण होन लगे. जिसमे एक मानव सभ्यता भी है। और कुछ सालों बाद बंदरों से मानव बने और वहीँ से फिर से शुरू हुआ पृथ्वी का अंत।

मानव सभ्यता की आत्मशक्ति व सोचने समझने की शक्ति जैसे जैसे बढ़ी वैसे वैसे रहने खाने-पिने में बदलाव लाने लगे। मांस कच्चा खाते थे उसे भून कर खाने लगे। और पेड़ो को कांट कर घर बना कर रहने लगे और तब से अब तक मानव सभ्यता अब तक किसी न किसी कारण से पृथ्वी नुकशान पहुंचा रहें। उस आग लगाने के अविष्कार से लेकर आज नुक्लेअर बम बायो बम तक मानव सभ्यता पहुँच गयीं है। ये तो हो गया पृथ्वी और मानव सभ्यता जन्म बारें। आगे ऐसी चीजें व डेटा के बारें बताऊंगा जिससे मालूम होगा की हमने पृथ्वी को क्या हानि पहुंचाई है और पहुंचा रहे है।

समुन्द्

ये जो उप्पर आप एक इमेज देख रहे हो उसमे आपको एक तरफ साफ समुन्द्र और एक तरफ गन्दा समुन्द्र दिखाई दे रहा है। हमें कई समुन्द्र को गन्दा करा है और अब भी कर रहे हैं जिससे हमारे पृथ्वी की कई तमाम पानी में रहने वाले जिव जंतु बहुत तेजी से बिलुप्त हो रहें है.

ये जो ऊपर आप सीधे हाथ की तरफ देख रहें वह समुन्द्र प्लास्टिक से भरा हुआ , सिर्फ प्लास्टिक ही नहीं करता है समुद्र को गन्दा लेकिन सबसे ज्यादा यही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल समुन्द्र में 8 मिलियन मेट्रिक टन प्लास्टिक समुन्द्र को गन्दा करता है। एक हालिया अध्ययन का अनुमान है कि उन सभी में से एक चौथाई से अधिक बर्बादी सिर्फ 10 नदियों से हो सकती है, जिनमें से आठ एशिया में हैं। आप निचे डाटा देख सकते है और फिर आप खुद ही बताओ की इस के जिम्मेदार कौन है।

जंगल और पहाड़ / Sad Earth

2011-2015 में हर साल लगभग 20 मिलियन हेक्टेयर जंगल काट दिया गया था। फिर चीजें तेज होने लगीं। 2016 के बाद से, हर साल औसतन 28 मिलियन हेक्टेयर की कटौती की गई है। 2016 में, 29.7 मिलियन हेक्टेयर वन का रिकॉर्ड गायब हो गया। यह 290,000 वर्ग किलोमीटर या लगभग इटली या नेवादा राज्य का एक क्षेत्र है। अगले वर्षों में ट्री कवर के नुकसान की दर में मामूली गिरावट देखी गई है।

1 अरब हेक्टेयर 40 वर्षों में कट गया

केवल 40 वर्षों में, एक वन क्षेत्र यूरोप के आकार में चला गया है। दुनिया के आधे वर्षावन का आधा हिस्सा सिर्फ एक सदी में नष्ट हो गया है। यदि हम कार्रवाई नहीं करते हैं और वनों की कटाई की वर्तमान दर जारी रहती है, तो दुनिया के वर्षावन 100 वर्षों में चले जाएंगे।

वन भारत का आकार गया

2001 से 2018 तक, वैश्विक स्तर पर कुल 3,610,000 वर्ग किलोमीटर पेड़ कवर खो गए थे। यह भारत से बड़ा क्षेत्र है और 2000 के बाद से ट्री कवर में 9.0 प्रतिशत की कमी के बराबर है। ब्राजील अमेज़ॅन वर्षावन का सबसे अधिक घर है और अब तक देश में सबसे अधिक जंगलों का नुकसान हुआ है। एक वर्ष में 1.3 मिलियन से अधिक का नुकसान हुआ है। इसके भी जिम्मेदार हम ही अपने जरूरत को पूरा करने के लिए हम जिस तेजी से पेड़ो की कतई कर रहे है उन्हें रोकना होगा। अगर आप इस बात पर सहमति जताते है तो ट्विटर पर ट्वीट करें #NoMoreDeforestation

प्रदुषण / Sad Earth

प्रदुषण पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है , हमने आगे बढ़ने जरूरतमंद चन्जो को ज्यादा बनापाने के लिए फैक्टरियां गाड़ियों का इस्तेमाल करना शुरू कर िद्या मगर हमने ये नहीं सोचा की यह हमरे लिए और हमरे पूरी पृथ्वी के लिए खतरनाक है अब आप निचे देखे और जाने कहाँ कितने मौते हर साल प्रदूषण से होती है।

राय

तो देख लिया अपने कितने लोग मरते हर साल में सिर्फ और सिर्फ प्रदूषण से आगे जरूर पढ़े। इसीलिए गाड़ियों को कम से कम इस्तेमाल करें और इस बारें में सरकार और हमें नए नियमो को बनाना चाहिए। और ज्यादा नहीं तो कम से कम हर साल हम 5 पेड़ लगा सकते है तो जरूर लगाए।

मुझे लगता है मेने जो भी बताया वो तो हमारी धरती को ख़तम करने का एक हिस्सा लेकिन ऐसे कई हिस्से और जिन्हे मेने इसमें नहीं बताया है इसके लिए माफ़ी चाहता हूँ आगे पूरी कोशिस करेंगे की और भी चीजे इस अर्तिक्ल के बारे में बताये। हमारा ये आर्टिक्ल अच्छा लगा हो तो लोगो को भेजों और इस के बारें में बताओ आप ट्विटर पर #NoMoreDeforestation #SadEarth ट्वीट भी चलाये

धन्यवाद अपना अमूल्य समय हमें

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