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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Chapter 4 मेरी जीवन रेखा Solutions

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 4 मेरी जीवन रेखा (महावीर प्रसाद द्विवेदी)

मेरी जीवन रेखा पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

१.रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से चुनकर कीजिए।

रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से चुनकर कीजिए।
1. उसने अपनी जीवनी कथा ……………….है। (कही, लिखी)
2. द्विवेदी जी थे …………………….. (शहरी, देहाती)
3. द्विवेदी का अनुराग …………….. पर हो गया था। (रामचरितमानस, सूरसागर)
4. सरस्वती …………. पत्रिका थी। (मासिक, साप्ताहिक)
5. ………………… की कमी के कारण द्विवेदी जी अध्ययन न कर सके। (धन, समय)

उत्तर- 1. लिखी,
2. देहाती,
3. रामचरितमानस,
4. मासिक,
5. समय।

प्रश्न-3.
दिए गए कथनों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए
1. द्विवेदी जी ने आदर्श निश्चित किए
1. चार,
2. दो,
3. 10
4. कोई नहीं।
उत्तर- 1. चार,

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2. द्विवेदी सम्पादक थे
1. हंस के,
2. माधुरी के,
3. सरस्वती के,
4. इंडियन प्रेस के।
उत्तर- 2. आठ रुपये,

3. द्विवेदी का जन्म हुआ था
1. 1884 में,
2.1864 में,
3. 1874 में,
4. 1964 में।
उत्तर- 3. 1864 में,

4. द्विवेदी जी को सरस्वती से आमदनी थी
1. तेईस रुपए,
2. आठ रुपये,
3. पन्द्रह रुपये,
4. बीस रुपये।
उत्तर- 4. तेइस रुपये,

5. अध्यापक ने पुस्तक दिखाई थी
1. ब्रजवासीदास,
2. रामचरितमानस,
3. कवि-वचन-सुधा,
4. तृतीय रीडर।
उत्तर-
5. …………………

प्रश्न- 2. सही जोड़ी मिलाइए

कर्मवीर – उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’
साये में धूप – डॉ. एन.ई. विश्वनाथ अय्यर
डूबता सूरज – दुष्यंत कुमार
गिरती दीवारें – रमानाथ अवस्थी
रात और शहनाई – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

उत्तर- कर्मवीर – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
साये में धूप – दुष्यन्त कुमार
डूबता सूरज – डॉ. एन.ई. विश्वनाथ अय्यर
गिरती दीवारें – उपेन्द्र नाथ ‘अश्क’
रात और शहनाई – रामानाथ अवस्थी

प्रश्न-3. निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।

1. द्विवेदी जी को अपनी कथा कहते हुए संकोच नहीं होता है।
2. रेलवे में द्विवेदी को पचास रुपये महीने मिलते थे।
3. द्विवेदी जी के पिता ईस्ट इंडिया कंपनी की पलटन में सैनिक थे।
4. अत्याचार के सहने से असहनशीलता प्रकट होती है।
5. ‘सरस्वती’ अपने समय की एकमात्र पाठकों की सेविका थी।

उत्तर- 1. असत्य,
2. सत्य,
3. सत्य,
4. असत्य,
5. सत्य।

प्रश्न-4. निम्नलिखित कथनों के उत्तर एक शब्द में दीजिए
1. द्विवेदी किसके आत्मज थे?
2. द्विवेदी जी का निधन कब हुआ?
3. द्विवेदी जी की उन्नति का प्रधान कारण क्या था?
4. प्रलोभनों पर द्विवेदी जी क्या बन जाते थे?
5. द्विवेदी जी किसका ख्याल रखते थे?

उत्तर- 1. देहाती के,
2. 1938 में,
3. ज्ञानलिप्सा,
4. गूंगा और बहरा,
5. पाठकों का।

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मेरी जीवन रेखालघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न-1. द्विवेदी जी के इस्तीफा वापस लेने के संबंध में उनकी पत्नी ने क्या कहा?
उत्तर- द्विवेदी जी के इस्तीफा वापस लेने के संबंध में उनकी पत्नी ने उनसे कहा, “क्या थूककर भी उसे कोई चाटता है?

प्रश्न-2. होशंगाबाद में द्विवेदी जी ने क्या नई उपलब्धियाँ प्राप्त की?
उत्तर- होशंगाबाद में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के ‘कवि-वचन-सुधा’ और गोस्वामी राधाचरण के एक मासिक पत्र ने द्विवेदी के अनुराग की वृद्धि कर दी।

प्रश्न-3. द्विवेदी जी लेखों की भाषा में किस प्रकार का संशोधन कर दिया करते थे?
उत्तर- द्विवेदी जी लेखों की भाषा में संशोधन अधिक पाठकों की समझ में आने लायक कर देते थे।

प्रश्न-4. इंडियन प्रेस में काम करते हुए द्विवेदी जी ने कौन-सी पुस्तक लिखी?
उत्तर- इंडियन प्रेस में काम करते हुए द्विवेदी जी ने ‘तृतीय रीडर’ पुस्तक लिखी।

मेरी जीवन रेखा दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न-1.
द्विवेदी जी ने अपने लिए कौन-से चार सिद्धान्त निश्चित किए और उनका पालन करने में वे कहाँ तक सफल हुए?
उत्तर-
द्विवेदी जी ने अपने लिए चार सिद्धांत या आदर्श निश्चित किए, यथा

  1. वक्त की पाबंदी करना,
  2. रिश्वत न लेना,
  3. अपना काम ईमानदारी से करना और
  4. ज्ञान-वृद्धि के लिए सतत प्रयत्न करते रहना। पहले तीन सिद्धांतों के अनुकूल आचरण करना तो सहज था, चौथे के अनुकूल सचेष्ट रहना कठिन था। फिर भी उसमें लगातार अभ्यास सफलता भी होती गई।

प्रश्न-2. ‘सरस्वती’ पत्रिका का संपादन कार्य द्विवेदी जी को किस प्रकार प्राप्त हुआ?

उत्तर-
महावीर प्रसाद द्विवेदी ने प्रयाग के ‘इंडियन प्रेस’ द्वारा प्रकाशित ‘तृतीय रीडर’ की समालोचना पुस्तकाकार में प्रकाशित की थी। इस समालोचना में द्विवेदी जी ने उस रीडर के बहुत-से दोषों का उल्लेख किया था। इससे प्रभावित होकर ‘इंडियन प्रेस’ द्वारा उन्हें ‘सरस्वती’ पत्रिका का सम्पादन-कार्य सम्भालने का प्रस्ताव रखा गया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

प्रश्न-3.
द्विवेदी जी को विद्यार्थी जीवन में किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
उत्तर-
द्विवेदी जी अपने गाँव के देहाती मदरसे में थोड़ी-सी उर्दू और घर पर थोड़ी-सी संस्कृत पढ़कर तेरह वर्ष की उम्र में मैं छब्बीस मील दूर रायबरेली के जिला स्कूल में अंग्रेजी पढ़ने गये। वे आटा, दाल घर से पीठ पर लादकर ले जाते थे। दो आने महीने फीस देते थे। दाल ही में आटे के पेड़े या टिकियाएँ पका करके पेट-पूजा करते थे। रोटी बनाना तब उन्हें आता ही न था। संस्कृत भाषा उस समय स्कूल में अछूत समझी जाती थी। विवश होकर अंग्रेजी के साथ फारसी पढ़ते थे। एक वर्ष किसी तरह वहाँ काटे फिर पुरवा, फतेहपुर और उन्नाव के स्कूलों में चार वर्ष काटे। कौटुम्बिक दुरवस्था के कारण वे इससे आगे न बढ़ सके। उनकी स्कूली शिक्षा की वहीं समाप्ति हो गई।

प्रश्न-4. द्विवेदी जी को सरस्वती पत्रिका में प्रकाशन करने के लिए किस तरह के प्रलोभन दिए जाते थे? इस संबंध में उनकी प्रतिक्रिया क्या होती थी?

उत्तर-
द्विवेदी जी को सरस्वती पत्रिका में प्रकाशन के लिए इस प्रकार प्रलोभन दिए जाते थे- कोई कहता-‘मेरी मौसी का मरसिया छाप दो, मैं तुम्हें निहाल कर दूँगा। कोई लिखता-‘अमुक सभापति की ‘स्पीच’ छाप दो, मैं तुम्हारे गले में बनारसी दुपट्टा डाल दूंगा।’ कोई आज्ञा देता-‘मेरे प्रभु का सचित्र जीवन-चरित्र निकाल दोगे तो तुम्हें एक बढ़िया घड़ी या पैरगाड़ी नजर की जाएगी।’ इन प्रलोभनों पर द्विवेदी जी बहरा और गूंगा बन जाते और ‘सरस्वती’ में वही मसाला जाने देते, जिससे वे पाठकों का लाभ समझते। वे उनकी रुचि का सदैव ख्याल रखते और यह देखते रहते कि उनके किसी काम से उनको, सत्पथ से विचलित होने का साधन न प्राप्त हो।

प्रश्न-5 आशय स्पष्ट कीजिए’अव्यवस्थित’ चित्त वाले मनुष्य की सफलता में सदा संदेह रहता है।

उत्तर-
उपर्युक्त वाक्य का आशय यह है कि व्यवस्थित चित्त से किया गया काम सुफल होता है। उसमें सहजता और सरलता होती है। आशंका तो उससे बिल्कुल नहीं होती है। इसके विपरीत अव्यवस्थित चित्त से किया गया काम कुफल होता है। वह दुखद होने के साथ आशंकाओं से भी भरा होता है।

मेरी जीवन रेखा योग्यता विस्तार

प्रश्न-1.
द्विवेदी जी के जीवन संघर्ष के प्रेरक प्रसंगों को पढ़िए।

प्रश्न-2.
द्विवेदी युग के समकालीन साहित्यकारों की सूची बनाइए और उनके बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए।

प्रश्न-3.
जीवन में उन्नति करने के लिए आप कौन-कौन से गुण आवश्यक मानते हैं? उनकी सूची बनाइए तथा कक्षा में चर्चा कीजिए।

प्रश्न-4.
म.प्र. से प्रकाशित होने वाली हिंदी भाषा की पत्र-पत्रिकाओं की जानकारी एकत्र कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

मेरी जीवन रेखा परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

मेरी जीवन रेखा अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

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प्रश्न-(क महावीर प्रसाद द्विवेदी के बापन के विषय में आप जो कुछ जानते हैं उसे संक्षेप में लिखिए।

उत्तर-
महावीर प्रसाद द्विवेदी को बचपन से ही तुलसीदास की रामायण और ब्रजवासीदास के ब्रजविलास से अनुराग हो गया था। उन्होंने सैकड़ों फुटकर कवित्त भी कंठस्थ कर लिये थे। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की पत्रिका ‘कवि वचन सुधा’ और गोस्वामी राधाचरण के मासिक पत्र से उनका साहित्य में अनुराग और भी बढ़ गया था। यद्यपि उन्हें स्कूली शिक्षा प्राप्त करने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

प्रश्न-(ख)
लेखक को अपनी जीवन-कथा लिखने की प्रेरणा कैसे मिली?
उत्तर-
लेखक को अपनी जीवन-कथा लिखने की प्रेरणा उनके मित्रों और हितैषियों से मिली। उन्होंने लेखक को अनेक पत्र लिखे। उन्होंने उन्हें अनेक उलाहने भी दिए। इस प्रकार अपने मित्रों और हितैषियों से अपनी जीवन-कथा लिखने की प्रेरणा प्राप्त की।

प्रश्न-(ग) द्विवेदी जी ने नौकरी से इस्तीफा क्यों दिया? .

उत्तर-
द्विवेदी जी रेलवे में नौकरी करते थे। संयोगवश उनके अधिकारी ने उन्हें प्रतिदिन सुबह आठ बजे दफ्तर में आने का आदेश दिया। उन्होंने उनका यह आदेश मान लिया। उनका अधिकारी चाहता था कि द्विवेदी जी अन्य कर्मचारियों को भी प्रातः आठ बजे कार्यालय में आने का आदेश दें। इसे उन्होंने मानना उचित नहीं समझा। बात बढ़ गई और उन्होंने नौकरी से बिना किसी सोच-विचार के त्याग-पत्र दे दिया।

प्रश्न-(घ)
रेल की नौकरी छोड़ने के वाद द्विवेदी जी ने क्या किया?
उत्तर-
रेलवे की नौकरी छोड़ने के बाद लेखक को मित्रों से सहायता के अनेक प्रस्ताव आए, पर उन्होंने किसी की भी सहायता स्वीकार नहीं की। उन्होंने ‘इंडियन प्रेस’ द्वारा दिए गए कार्य अर्थात् ‘सरस्वती’ पत्रिका के सम्पादन कार्य को स्वीकार कर लिया। अवकाश के समय में वह अनुवाद आदि का भी थोड़ा-बहुत काम कर लिया करते थे।

मेरी जीवन रेखा लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न-1.
महावीर प्रसाद द्विवेदी ने आत्मकथा क्यों लिखी थी?
उत्तर-
महावीर प्रसाद द्विवेदी क्या थे, इसका ज्ञान उनके मित्रों और हितैषियों को नहीं था। वे केवल द्विवेदी जी के ‘वर्तमान’ को ही जानते थे। अतएव अपने मित्रों और हितैषियों की जानकारी हेतु उन्होंने आत्मकथा लिखी।

प्रश्न-2.
महावीर प्रसाद द्विवेदी को अपनी कथा कहने में संकोच क्यों था?
उत्तर-
महावीर प्रसाद द्विवेदी का विचार था कि उनकी आत्मकथा में कोई तत्त्व नहीं है। उससे कोई कुछ सीख भी नहीं सकता। इन कारणों से उन्हें आत्मकथा लिखने में संकोच होता था।

प्रश्न-3.
महावीर प्रसाद द्विवेदी का जन्म कहाँ और कब हुआ था?
उत्तर-
महावीर प्रसाद द्विवेदी का जन्म उत्तर प्रदेश में रायबरेली जिले के दौलतपुर गाँव में सन् 1864 ई. में हुआ था।

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प्रश्न-4.
द्विवेदी जी लेखों की भाषा में किस प्रकार का संशोधन करते थे?
उत्तर-
द्विवेदी जी पाठकों की रुचि का सदा ध्यान रखते थे। लेखों की भाषा के सुधार में भी उनका यही दृष्टिकोण रहता था। वे संशोधन द्वारा लेखों की भाषा अधिक-से-अधिक पाठकों की समझ में आने योग्य कर देते थे। वे ऐसे शब्दों का प्रयोग करते थे जिन्हें अधिक-से-अधिक पाठक समझ सकते थे।

प्रश्न-5.
द्विवेदी जी ‘सरस्वती’ में किस प्रकार की सामग्री प्रकाशित करते थे?
उत्तर-
द्विवेदी जी पाठकों की रुचि का ध्यान रखते थे और ‘सरस्वती’ में वही सामग्री प्रकाशित करते थे जो पाठकों के लिए लाभप्रद होती थी। इसके लिए वे लेखों की भाषा में संशोधन भी कर दिया करते थे ताकि उसे अधिक-से-अधिक पाठक समझ सकें।

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