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MP Board Class 10th Hindi Chapter 3 मीरा के पद Solutions

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Chapter 3 मीरा के पद (मीराबाई) Solutions

1. रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्द के चयन से कीजिए

1. फागुन के दिन …………… हैं। (दो, चार)
2. होली खेलत समय बिना करताल के ………………. बज रहे हैं। (ढोल, पखावज)
3. सारा आकाश लाल हो गया है …………… से। (रंग, गुलाल)
4. कवियित्री को अमोलक उसके …………… ने उसे दी। (गुरु, प्रियतम)
5. कवियित्री के स्वामी …………. हैं। (राम, गिरिधरनागर)

उत्तर- 1. चार,
2. पखावज,
3. गुलाल,
4. गुरु,
5. गिरिधरनागर

प्रश्न 3. दिए गए कथनों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए।
1. अब आ गए हैं
(क) जाड़े के दिन,
(ख) बहार के दिन,
(ग) फागुन के दिन
(घ) छुट्टी के दिन।
उत्तर- (ग) फागुन के दिन

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2. राग बज रहे हैं
(क) पखावज,
(ख) अनहद,
(ग) झनकार
(घ) छत्तीस।
उत्तर- (घ) छत्तीस।

3. होली के रंग में रंग गए हैं’
(क) शरीर के रोंगटे,
(ख) गुलाल,
(ग) केशर,
(घ) घर-द्वार।
उत्तर- (क) शरीर के रोंगटे,

4. राम रूपी रत्न है
(क) मूल्यवान,
(ख) बहुमूल्य,
(ग) अमूल्य,
(घ) असाधारण।
उत्तर- (ग) अमूल्य,

5. सत्यरूपी नाव के नाविक हैं
(क) भक्त,
(ख) ईश्वर,
(ग) सज्जन,
(घ) सद्गुरु।
उत्तर- (घ) सद्गुरु।

प्रश्न 2. निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य? वाक्य के आगे लिखिए

1. मीराबाई रीतिकाल की हैं।
2. मीरा श्रीकृष्ण की उपासिका थीं।
3. श्रीकृष्ण को गिरिधरनागर कहा जाता है।
4. सद्गुरु ईश्वर से छोटा है।
5. मीरा ने लोकलाज का परित्याग नहीं किया था।

उत्तर- 1. असत्य,
2. सत्य,
3. सत्य,
4. असत्य,
5. असत्य।

प्रश्न 3. एक शब्द में उत्तर दीजिए।
1. होली कैसे खेलनी चाहिए?
2. आकाश में क्या उड़ रहा है?
3. यूँघट के पट खोल देने पर क्या समाप्त हो गए?
4. सत्य की नाव का नाविक कौन है?
5. गिरिधर नागर कौन है?

उत्तर- 1. मन से,
2. गुलाल,
3. लोकलाज,
4. सद्गुरु,
5. श्रीकृष्ण।

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मीरा के पद लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. ‘फागुन के चार दिन’ से क्या आशय है?
उत्तर- ‘फागुन के चार दिन’ से आशय बहुत कम रह जाने से है।

प्रश्न 2. होली में अंबर कैसा हो गया है?
उत्तर- होली में अंबर उड़ते हुए गुलाल से लाल हो गया है।

प्रश्न 3. मीरा के प्रभु कौन हैं?
उत्तर- मीरा के प्रभु गिरिधरनागर श्रीकृष्ण हैं।

प्रश्न 4. मीरा को अमोलक धन किसकी कृपा से मिला है?
उत्तर- मीरा को अमोलक धन उसके सद्गुरु की कृपा से मिला है।

मीरा के पद दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. होली के आनंद में संगीत के साज कैसे बजते हैं?
उत्तर- होली के आनंद में संगीत के साज करताल के ही समान बजते हैं। वे बिना सुर के ही बजते हैं। इस प्रकार अनहद की झंकार होने लगती है।

प्रश्न 2. मीरा ने ‘राम रतनधन’ को अमोलक क्यों कहा है?
उत्तर- मीरा ने ‘राम रतनधन को अमोलक कहा है। यह इसलिए कि इससे सभी प्रकार के सांसारिक बंधन समाप्त हो गए हैं। दूसरी बात यह है कि इसे न तो चोर चुरा सकता है और न यह खर्च करने पर घटती है। यह तो खर्च करने पर बढ़ता ही जाता है।

प्रश्न 3. ‘सत की नाव खेवटिया सद्गुरु’ इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- ‘सत की नाव खेवटिया सद्गुरु’ पंक्ति के द्वारा कवियित्री मीराबाई ने यह भाव व्यक्त करना चाहा है कि सद्गुरु की कृपा ईश्वर के समान अद्वितीय होती है। वह सर्वसमर्थ और दया का सागर होता है।

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मीरा के पद योग्यता विस्तार

प्रश्न 1. मीराबाई के अन्य पदों को खोजकर उनका कक्षा में सस्वर वाचन कीजिए।
2. मीराबाई के जीवन से जुड़ी घटनाओं को खोजकर अपनी पुस्तिका में लिखिए।
प्रश्न 3. शिक्षक की सहायता से छत्तीस रागों में से कुछ प्रमुख रागों की सूची बनाइये।

उत्तर- उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

मीरा के पद अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (क) अब मन से होली खेल लेना चाहिए। ऐसा कवियित्री ने क्यों कहा है?
उत्तर- अब मन से होली खेल लेना चाहिए। ऐसा कवियित्री ने इसलिए कहा है कि शायद ऐसा अवसर फिर नहीं मिलेगा।

प्रश्न (ख) कवियित्री की लोक-लज्जा कब दूर हो गई?
उत्तर- कवियित्री की लोक-लज्जा तब दूर हुई, जब उसने आनंदमय रस में भीग कर अपने हृदय रूपी घड़े के पट को खोल दिया।

प्रश्न (ग) 1. कवियित्री का प्रियतम कौन है?
उत्तर- कवियित्री का प्रियतम निर्गुण ब्रह्म श्रीकृष्ण हैं।

मीरा के पद लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न (क) ‘फागुन के दिन चार हैं। इसका क्या आशय है?
उत्तर- ‘फागुन के दिन चार है। इसका आशय है-अब बहुत कम दिन रह गए हैं।

प्रश्न (ख) कवियित्री ने अपनी पिचकारी में क्या भर लिये हैं?
उत्तर- कवियित्री ने अपनी पिचकारी में शील और संतोष रूपी केशर के घोल भर लिये हैं।

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प्रश्न (ग) कवियित्री भवसागर से कैसे पार हो गई?
उत्तर- सत्य की नाव सद्गुरु के खेवे जाने पर कवियित्री भवसागर से पार हो गई।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

पायो जी मैं तो राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सद्गुरु, करि किरपा अपनायो।
जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सबे खोवायौ।
खरचे नहिं कोई चोर न लवे, दिन-दिन बढ़त सवायौ।
सत की नाव खेवटिया सद्गुरु, भव सागर तरि आयो।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, हरखि-हरखि जस गायौ।।

शब्दार्थ-रतन रत्न। अमोलक-अमूल्य या बहुमूल्य। खोवायो खो दिया। सत=सत्य। खेवटिया खेने वाला। भव-सागर संसार सागर। तरि तर जावे या पार हो जावे। हरखि-हरखि प्रसन्न-प्रसन्न होकर। जस यश।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-इस पद में मीराबाई ने राम की प्राप्ति को एक अनमोल रत्न के रूप में प्राप्त होने के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या-मुझे राम रूपी रत्न का धन मिल गया है। यह बहुमूल्य वस्तु हमारे गुरु ने कृपा करके मुझे दी है जिसे मैंने तन-मन से ग्रहण कर लिया है। यह वह संपत्ति है जिसके लिए मैं जन्म-जन्मांतरों से लालायित थी और वह अब मुझे मिल गई है। इस पूँजी को प्राप्त कर लेने पर संसार की सभी वस्तुएँ-सांसारिक बंधन-नष्ट हो गए हैं। यह ऐसी पूँजी है जो खर्च करने पर कम नहीं होती और जिसे चोर नहीं चुरा सकता, बल्कि प्रतिदिन सवाई होती रहती है। मेरी सत्य की नाव है, जिसका खेने वाला (नाविक) सद्गुरु है, इसीलिए मैं इस भवसागर से पार हो गई हूँ। मीरा कहती है कि मेरे स्वामी तो गिरधरनागर हैं, जिनका मैं हर्ष-हर्ष करके यश गाती हूँ।

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विशेष-
1. इस पद की भाषा ब्रजभाषा है। ‘म्हारे’ प्रयोग केवल राजस्थानी का है।
2. भावात्मक शैली है।
3. रूपक अलंकार है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर

(क) भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद की भाव-योजना प्रेरक रूप में है। सदगुरु को बेजोड़ उपकारी के रूप में प्रस्तुत करके उसके व्यक्तित्व और प्रभाव को ईश्वर के समकक्ष लाने का प्रयास किया गया है। इससे कवियित्री के द्वारा गुरु-मन किए जाने की सच्चरित्रता प्रकट हो रही है। इसके साथ ही कवियित्री द्वारा अपने स्वामी श्रीकृष्ण के प्रति सहर्ष समर्पण के भाव अधिक मोहक और आकर्षक हैं।

प्रश्न 2.
कवियित्री को किससे क्या मिला है?
उत्तर-
कवियित्री को उसके सद्गुरु से रामरूपी अमूल्य रत्न-धन मिला है।

प्रश्न 3.
सद्गुरु का स्वरूप कैसा है?
उत्तर-
सद्गुरु का स्वरूप भवसागर से पार लगाने वाला ईश्वर के समान है।

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(ख) शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद का शिल्प-सौंदर्य भाव, भाषा-शैली, बिम्ब, प्रतीक, योजना आदि विधानों से मंडित है। पूरे पद की भाषा ब्रजभाषा की प्रधानता लिये हुए है। इससे प्रस्तुत हुई शब्द-योजना सरल, सहज और प्रवाहमयी हो गयी है। तुकान्त शब्दावली से लय और संगीत का सुंदर मेल हुआ है। भावात्मक शैली और भक्ति रस का संचार इस पद को और अधिक रोचक बना रहे हैं।

प्रश्न 2.
‘जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सवै खवायो।’ उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार छाँटिए।
उत्तर-
‘जनम-जनम’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार।

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